काश हमको वो मुलायम तकिया मिल जाये...
की जिसमे रखके हम अपनी आँखें सोच सके रात दिन, वो हर एक लम्हा जो हमने आपके साथ भरपूर जिया है..
की जिसको हम लगा के सीने से कर सके वो तमाम बातें जो शायद कभी सामने ना कह सके,,,, की दरअसल जब भी उनको कहना चाहा अक्सर , तो ये सोच के जाने दिया कि शायद तुमको अच्छा नही लगेगा..
वो तकिया जो महफ़ूज़ रखे हमारे सारे राज़, सारे आंसू और वो सब सिसकियां जो कभी तेरे खो जाने के डर से रूबरू हो गये, काश हमको वो मुलायम तकिया मिल जाये..
कभी गर्दन के नीचे रख लेते उसको जब सुकून की तलाश होती , या कभी सीने पे रख लेते जब होता ख्याल कुछ शरारत करने का, और जब याद हद से गुजर जाती तो शायद कस के गले लगा लेते
शायद जो रख पाता कुछ दाग मेरे आंसूओं के जो मुझे याद दिलाता अक्सर की उस रात मैं बहुत था रोया जब कहा था उसने की इश्क़ कहाँ सब को मुक्कमल होता है...
वो मुलायम तकिया शायद कहीं से मिल जाये , मेरा हमसफ़र और मेरा साथी बन जाये... या फिर क्यों ना ऐसा हो की महबूब की बाहँ ही बन जाये वो तकिया,,,
#Shankar
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